Monday, May 16, 2022
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वाईफाई क्या है

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि आजकल टेक्नोलॉजी (technology) का ज्यादा इस्तेमाल होने लगा है आप जहां भी जाएंगे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ज्यादा ही करते पाएंगे आज हम आपको कुछ ऐसे ही टेक्नोलॉजी के बारे में बताने वाले हैं. जिसके बारे में आपने सुना होगा और देखा भी होगा।

 आज हम आपको बताने वाले हैं, वाईफाई (WiFi) के बारे में आखिर वाईफाई होता क्या है ,यह कैसे काम करता है, इसका क्या इतिहास है इसके बारे में हम विस्तार पूर्वक आपको बताएंगे तो चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं।

आपको बता दें कि वाई फाई का पूरा नाम वायरलेस फर्टिलिटी(Wireless Fidelity)है. जो कि एक बहुत ही महत्वपूर्ण लोकप्रिय टेक्नोलॉजी है. जिसे हम आज वॉयरलैस नेटवर्किंग टेक्नोलॉजी(Wireless Networking Technology) के नाम से भी जानते हैं, जिसके जरिए हम आज इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्शन से जुड़े हुए हैं.

चलिए आपको हम एक आसान भाषा में आपको इसे बताते हैं जैसा कि आप सभी जानते हैं यह वह टेक्नोलॉजी है जिसके जरिए हम आज अपने स्मार्टफोन कंप्यूटर लैपटॉप में बिना तार (Wireless) के इंटरनेट की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं. जिसके जरिए हम बिना किसी अन्य स्थान पर गए हुए अपने घर में ही इंटरनेट का मजा ले सकते हैं.

 आजकल हर कोई वाईफाई के जरिए ही इंटरनेट एक्सेस करता है, और साथ ही साथ अपनी महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण फाइल को एक दूसरे के पास आसानी से भेज सकता है ,यह सब कुछ संभव है वायरलेस इंटरनेट के जरिए जिसे हम वाईफाई भी कहते हैं.

हम आपको वाईफाई मानक WiFi Standard के कुछ महत्वपूर्ण मानक बताएंगे जो कि कैसे-कैसे शुरू हुए उसके बारे में जानेंगे।

  • सबसे पहले साल 1999 में IEEE द्वारा यह बनाया गया था जो कि 5 GHz आवर्ती पर 54 एमबीपीएस(Mbps) की स्पीड देता था जो कि 115 फीट तक काम करता था.
  • साल 1999 में IEEE द्वारा यह घरों के लिया बनाया गया था, जो कि 5 GHz आवर्ती पर 11 एमबीपीएस(Mbps) की स्पीड देता था जो कि 115 फीट तक काम करता था.
  • 2003 में इसका तीसरा जनरेशन आया जिसमें इसकी स्पीड 2.4 GHz आवर्ती पर 54 (Mbps) गति से 125 फिट तक काम करता था.

बता दें कि इसकी स्पीड बढ़ाने के लिए इस पर तेज गति से काम चलने लगा और यह नए वर्जन में 2009 में लांच हुआ जिसमें इसकी स्पीड डबल हो गई जो कि डुएल बैंड राउटर (Dual Band Router) पर काम करने के लिए बनाई गई थी इसके द्वारा  हम 54 एमबीपीएस की स्पीड पाकर 230 फीट तक काम कर सकते थे.

यह कुछ वाईफाई के मानक (Standard) थे जिसका उपयोग करके नेटवर्क कनेक्शन जोड़ने वाले कंप्यूटर नेटवर्क से वायरलेस  नेटवर्क को जोड़ते है।  आपको बता दें कि अभी के समय में जितना भी लैपटॉप, कंप्यूटर, प्रिंटर और स्मार्ट फोन आते हैं उन सभी में भी वाईफाई चिप (WiFi Chip} होती है. जिसके जरिए हम और आप वॉयरलैस राउटर से जुड़े होते हैं और आसानी से इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाते हैं यह सब संभव हुआ है वाईफाई मानक के जरिए ही.

आपको बता दें कि जब वाईफाई अनेबल होता है उसके बाद ही वॉयरलैस राउटर से उसे कनेक्ट किया जाता है तब जाकर आप इंटरनेट एक्सेस कर पाते हैं लेकिन यदि राउटर को जोड़ना हो इंटरनेट से तो इसके लिए डीएसएल (DSL) और केबल मॉडेम(Cable Modem) का इस्तेमाल करना पड़ता है, वरना इंटरनेट एक्सेस( Internet Access) नहीं हो पाएगा और आपका इंटरनेट नहीं चल पाएगा।

आपको बता दें कि वाईफाई का नाम हाई फाई (Hi Fi) से भी बिल्कुल मिलता जुलता है। जिसका फुल फॉर्म हाई फिडेलिटी(High Fidelity) है. वाईफाई का फुल फॉर्म वायरलेस फिडेलिटी( Wireless Fidelity)  नहीं है. यह बस एक नाम दिया गया है जिससे कि लोगों को आसानी हो इसे जानने में.

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वाईफाई टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है इसके बारे में आपको बताने जा रहे हैं विस्तार पूर्वक:

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि आजकल हर कोई वाईफाई का इस्तेमाल कर रहा है चाहे वह ऑफिस हो घर हो हॉस्टल हो हॉस्पिटल हो हर जगह वाईफाई टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है लेकिन यह किसी को नहीं पता यह कैसे काम करता है।

आज हम आपको उसी के बारे में बताने वाले हैं. हम आपको बता दें कि इस टेक्नोलॉजी को चलाने के लिए इसमें एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की आवश्यकता होती है जिसको हम वायरलेस ट्रांसमीट राउटर (Wireless Transmitter/Hub/Router)  भी कहते हैं,

 यह डिवाइस वाईफाई नेटवर्क को create करता है और यह वायरलेस डिवाइस या राउटर या ब्रॉडबैंड कनेक्शन के द्वारा इंफॉर्मेशन को रिसीव करता है जिसके जरिए वाईफाई टेक्नोलॉजी काम करती है इसके अंदर कुछ Components होते हैं.

 जो कि इंफॉर्मेशन को रेडियो वेव में कन्वर्ट करते हैं, यह डिवाइस इन कन्वर्टेड वेब्स Converted Waves  को बाहर इमिट के द्वारा छोटे छोटे से वायरलेस सिग्नल Wireless Signals के जरिए एरिया में बांट दिए जाते हैं जो कि वाईफाई जोन WiFi zone कहलाते हैं.

यह छोटा सा एरिया एक WLAN लोकल एरिया नेटवर्क रूप (wireless Local Area Network) में ले लेता है इसी छोटे से एरिया में जितने भी डिवाइस हैं जैसे कि स्मार्टफोन कंप्यूटर लैपटॉप प्रिंटर इत्यादि, अगर इन सभी डिवाइसों में इनबिल्ट वायरलेस एडाप्टर Wireless Adapter होता है जिनकी मदद से हम बड़ी आसानी से वाईफाई सिगनल कोर प्राप्त कर सकते हैं.

आपको बता दें कि यदि फोन वाईफाई से कनेक्टेड है तो आप समझ जाना कि उस फोन में वायरस एडेप्टर डिवाइस है जोकि रेडियो सिगनल को प्राप्त करता है और आपको वाईफाई से जुड़े रखता है.

 इसके लिए आप को ध्यान में रखना है कि आपका नेटवर्क वाईफाई के पास ही हो अगर आप उसे दूर हुए तो आपका वायरलेस नेटवर्क कनेक्शन भी खो जाएगा और आप वाईफाई से दूर हो जाएंगे आपको बता दें कि वाई फाई की रेंज आपके घर के अंदर और आसपास वाले एरिया में ही होती है मतलब 10 से 20 मीटर तक ही इसकी रेंज हो पाती है.

जैसा कि आप सभी जानते हैं जब आप कुछ इंफॉर्मेशन जैसे कि टैक्स इमेज ऑडियो वीडियो इत्यादि वॉयरलैस ट्रांसमीटर के द्वारा भेजते हैं तो इस प्रक्रिया में यह विपरीत रूप से काम करती है जैसे कि आप वाईफाई से जुड़े हैं और इसका मतलब है, कि मोबाइल में आपने कोई टैक्स मैसेज भेजा यह मैसेज मोबाइल से बाहर निकलने से पहले ही रेडियो वेव में कन्वर्ट हो जाती है और ट्रांसमीटर राउटर तक सिग्नल पहुंचने के बाद यह टेक्स को सिग्नल में कन्वर्ट करके ब्रॉडबैंड में ट्रांसलेट कर देती है ,जिससे कि  Receiver  को प्राप्त होता है यह सब संभव हो चुका है सिर्फ वाईफाई के ही कारण आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी कैसी लगी हमें जरूर बताएं कमेंट करके।

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